Friday, October 3, 2014

कुंडलिया छंद-  १- पनघट
पनघट खाली हो रहे, रहा नही अब नीर,
इधर बाढ़ से दूर तक,दिखे नदियाँ तीर |
दिखे नदियाँ तीर,जलमग्न है थल सारा
गिरी मनुज पर गाज,प्रकृति से मानव हारा
उत्तरकाशी गाँव, बन गए  जैसे  मरघट
बचा कोई प्राण, सूने रह गए पनघट ||
 (2) नदिया

नदियाँ सब बेहाल है, नहीं मनुज का ध्यान,
वृक्ष सभी अब कट गए, नहीं रहे खलिहान |
नहीं रहे खलिहान, रहे किसान अब भूखे 
प्रकृति का नहीं ध्यान,गाँव में पढता सूखे |
समझे संकेत, मनुष्य गया क्यों सठिया,
रोजी रोटी भूख, सभी दे सकती नदियाँ ||

()– दो रंगी दुनिया 9.3.2014
दो रंगी दुनिया हुई, मन में बसता चोर,
रिश्ते की ढीली हुई, सबके मन की डोर 
सबके मन की डोर, सभी अपना हित साधे 
माया के बस मोह,  जपे ह्रदय से राधे 
गुरु शिष्य सम्बन्ध, बना सकते सतरंगी 
सपने हो साकार, रहे भाव दो रंगी |
(4 दुनिया दो रंगी )
दुनिया दो-रंगी हुई, फैला आज विकार 
अपनों से ही मिल रहा,दुश्मन सा व्यवहार 
दुश्मन सा व्यवहार, सभी रश्ते में मिलता 
करे दिखावा प्यार, नहीं लगाव का रिश्ता 
फितरत से लाचार, और में ढूंढे कामियां
मन में भरे मिठास, निभावे रिश्ता दुनिया |
 (5) गंगा जमने सभ्यता

गंगा जमनी सभ्यता,  देखे  विश्व  समाज
कुम्भ स्नान सब कर रहे,छोड़ छाड़ सब काज
छोड़ छाड़ सब काज, मगन होकर स्नान करे,
कविगण भी है आजसभी माँ का  ध्यान धरे
रखते सब सद्भाव,  यही मनोहर  सत्यता,
सुन्दर मन के भाव, गंगा जमनी सभ्यता       
(6).जज्बा
जज्बा रख यदि ठानले, लगे सफलता हाथ,
काम करे उत्साह से,मिले सभी का साथ 
मिले सभी का साथ,, सभी उत्साहित रहते
रखकर ऊँची सोच,, मदद आपस में करते
करे सोच कर काम,, लगे कभी भी धब्बा
संकट जाता हार, हो जब कर्म का जज्बा ||
(7)यात्रा एक आइना
यात्रा जैसा आइना, ज़रा गौर से देख 
सुन्दरता वर्णन करे, विद्वानों के लेख 
विद्वानों के लेख, बहुत सा संज्ञान मिले
पढ़े जब शिलालेख,सांस्कृतिकआभास मिले
बिन यात्रा के आप, ले सके ज्ञान वैसा 
मिले वही ये ज्ञान, स्थान हो यात्रा जैसा  ||  
(8चुनावी बिगुल
आता समय चुनाव का, मतदाता तब नाथ
वादे करते रहे, दल बल के सब साथ |
दल बल के सब साथ, करे नेता सब वादे 
जनता को है भान, नहीं है नेक इरादे |
कह लक्ष्मण कविराय,खेल गुण्डों को भाता    
करना सही चुनाव, सही अवसर यह आता

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