कुंडलिया छंद - उन्ही का लेखन निख्र्रे
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निखरे छवि माँ शारदा,जब दे विद्या दान,
शिल्प स्वरों को साधते,जिसे मिले वरदान
जिसे मिले वरदान, ह्रदय में श्रद्धा रखते
माँ देती सौगात,स्वाद लेखन का चखते ।
कवि लक्ष्मण मतिमूड,हमेशा यूँ ही बिफरे
माँ देती आशीष, उन्ही का लेखन निखरे।
शिल्प स्वरों को साधते,जिसे मिले वरदान
जिसे मिले वरदान, ह्रदय में श्रद्धा रखते
माँ देती सौगात,स्वाद लेखन का चखते ।
कवि लक्ष्मण मतिमूड,हमेशा यूँ ही बिफरे
माँ देती आशीष, उन्ही का लेखन निखरे।
(2) प्यार से जीना सखे
जीना जब संसार में, अन्तस से हो प्यार
जीवन जीना प्यार से, तब जीने में सार ।
तब जीने में सार, ह्रदय में खुशियाँ छाये
सदा रहे खुशहाल, निराशा दूर भगाये ।
लक्ष्मण रह खुशहाल, बहाते रहे पसीना
कर के अच्छे काम, प्रेम से जीवन जीना ।
जीवन जीना प्यार से, तब जीने में सार ।
तब जीने में सार, ह्रदय में खुशियाँ छाये
सदा रहे खुशहाल, निराशा दूर भगाये ।
लक्ष्मण रह खुशहाल, बहाते रहे पसीना
कर के अच्छे काम, प्रेम से जीवन जीना ।
(3) भारत माँ के लाल
भारत
माँ के लाल का, खौल रहा था खून,
आजादी जल्दी मिले, मन में
यही जुनून |
मन में यही जुनून, शीघ्र आये आजादी
मन में था अवसाद, देख होती बर्बादी |
शहीद हुए सपूत, देश वासी है आहत
करता रहे प्रणाम, सदा ये पूरा भारत ||
मन में यही जुनून, शीघ्र आये आजादी
मन में था अवसाद, देख होती बर्बादी |
शहीद हुए सपूत, देश वासी है आहत
करता रहे प्रणाम, सदा ये पूरा भारत ||
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